सृष्टि रचना
सबका मालिक एक है वह कबीर साहिब है
यहां पृथ्वी पर चार युग में अलग-अलग नाम से हर युग में आते हैं कबीर परमेश्वर जी।
1सतयुग में सतसुकृत के नाम से आते हैं
2त्रेता युग में मुनींद्र जी के नाम से आते है
3 द्वापउर युग में करुणामय के नाम से आते है
4 कलयुग में अपने असली नाम कबीर साहेब के नाम से आते हैं
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ब्रह्मा विष्णु महेश की माता
शेरावाली दुर्गा
शेरावाली माता दुर्गा के पति काल ब्रह्म
परब्रह्म यह सब जन्म और मृत्यु के अंडर में है।
भगवान ब्रह्मा जी की उम्र 7 करोड़ 20 लाख चर्तुयुग की है
भगवान विष्णु जी की उम्र 50 करोड 40 लाख चर्तुयुग की है
भगवान शंकर की उम्र तीन अरब 52 करोड़ 80 लाख चर्तुयुग की है
ब्रह्म की उम्र 70 हजार शिव मरने के बाद एक ब्रह्म मरता है
हजार बार ब्रह्म काल की मृत्यु होती हैं इतना बड़ा परब्रह्म एक दिन होता है
100 वर्ष पूरा होने के बाद परब्रह्म की मृत्यु होती है
अविनासी परमात्मा कबीर साहेब है
हाड़ मास लहू नहीं मेरे जाने सतनाम उपाशी ।
तारण तबे अबे पद मैं हूं कबीर अविनाश।।
इसका प्रमाण यजुर्वेद अध्याय 40 के मंत्र 8 में है
इसका प्रमाण गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में
गीता अध्याय 2 श्लोक 17 में
जो अविनाशी परमात्मा है वह कबीर साहिब जी है वह सतलोक में रहता है वहां से हम सब की उत्पत्ति हुई है
अर्थात सृष्टि की रचना हुई है
पांच तत्व, आकाश ,वायु ,तेज ,जल, पृथ्वी,
तीन गुण, सतोगुण रजोगुण तमोगुण
यह पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब ने काल ब्रह्म को तपस्या के बदले में दिए थे सतलोक में
इस पांच तत्व से और तीन गुणों से ही काल ब्रह्म की सृष्टि चलती है 100000 रोज काल ब्रह्म जीव को खाता है और सवा लाख रोज उत्पन्न करता है
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http://www.jagatgururampalji.org
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